गर्भाशय का कैंसर

गर्भाशय कैंसर ऐसी बीमारी है जो किसी भी महिला को किसी भी उम्र में हो सकती है। सही समय पर पहचान हो जाए और सही इलाज हो तो उससे मुक्ति पाई जा सकती है। यह बीमारी किसी खास उम्र में नहीं होती लेकिन पचास साल से ज्यादा उम्र के औरतो मे खतरा सबसे ज्यादा होता है। औरतों की लापरवाही के कारण उन्हें कैंसर तेजी से बढ़ता जा रहा है। गर्भाशय कैंसर के लक्षणों को महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। जिसके कारण यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है। वहीं ज्यादातर महिलाओं में इस बीमारी की सही जानकारी न होने के कारण इसकी चपेट में आ जाती हैं। कैंसर का रोग महामारी के रूप में फैल रहा है इसमें भी गर्भाशय का कैंसर चौथे नंबर पर है। जो महिलाओं को होने वाली खतरनाक बीमारी है हर साल इस बीमारी के कारण करीब पांच लाख से भी ज्यादा महिलाएं प्रभावित होती है इस बीमारी का कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस है।

गर्भाशय कैंसर के कारण-

गर्भाशय का कैंसर होने का कारण कोशिकाओं की अनियमित वृद्धि है गर्भपात होने से बचाने वाली दवाई भी सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। बहुत सी महिलाएं सर्वाइकल कैंसर का इलाज कराने में लापरवाही करती हैं जो कि जानलेवा बन सकता हैं। जो महिलाएं जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक होती है उन्हे गर्भाशय कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। जिनके कुछ कारण इस प्रकार है-

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  1. यदि किसी महिला में हार्मोन का विकास सामान्य तरीके से ना हो तो कई सारी बीमारियों का कारण बन सकता है। गर्भाशय का कैंसर भी एसी ही बीमारी है, जो मुख्य रूप से हार्मोन के असामान्य विकास की वजह से होता है।
  2. गर्भाशय का कैंसर उन महिलाओं में होने की संभावना अधिक होती है जिनका वजन ज्यादा होता है।
  3. यदि किसी महिला ने हाल में ही ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कराया है तो उसे गर्भाशय का कैंसर भी हो सकता है।इसका कारण ब्रेस्ट कैंसर का दुष्प्रभाव हो सकता है।
  4. गर्भाशय का कैंसर मधुमेह से पीड़ित महिलाओं में भी हो सकता है क्योंकि मधुमेह में शरीर में इंसुलिन नहीं बनता है इसी कारण शरीर की कार्य क्षमता काफी कम हो जाती है।
  5. यदि कोई महिला पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम नामक बीमारी से ग्रस्त होती है तो उसे गर्भाशय का कैंसर की संभावना अधिक होती है।

गर्भाशय कैंसर के लक्षण

गर्भाशय कैंसर के अगर ये लक्षण दिखाई दे तो महिला को सावधान होना चाहिए और अपने स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए-




  1. रजोनिवृत्ति के दौरान या उसके बाद रक्तस्राव हो या योनि से सफेद पानी आना तो यह गर्भाशय कैंसर का प्रमुख लक्षण है। यदि किसी महिला को ऐसी समस्या होती है तो वो डॉक्टर से संपर्क करे।
  2. अगर किसी महिला को लंबे समय तक भूख ना लगने की समस्या होती है तो उसे नजरअंदाज नही करना चाहिए।
  3. मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव होना समान्य प्रक्रिया है लेकिन अगर रक्तस्राव अधिक मात्रा मे होता है तो यह गर्भाशय कैंसर का लक्षण हो सकता है।
  4. यदि किसी महिला को पैल्विक दर्द होता है तो उसे इसके लिए दर्द निवारक दवाईयो का सेवन नही करना चाहिए इसकी जांच मेडिकल तरीके से जांच करानी चाहिए।
  5. सम्बन्ध बनाते समय अधिक दर्द हो तो नजरअंदाज ना करे।
  6. गर्भाशय कैंसर का अन्य लक्षण अत्यधिक कमजोरी महसूस होना भी होता है। आमतौर पर इसे गंभीरता से नही लिया जाता है।
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गर्भाशय कैंसर से बचाव

आप एंडोमेट्रियल कैंसर से बचाव नहीं कर सकती लेकिन उसकी होने की संभावना पर जरूर नियंत्रण रख सकती है।







  1. शरीर का वजन नियंत्रित रखें क्योंकि शरीर की वसा कोशिकाएं एस्ट्रोजन बनाते हैं।
  2. यदि आप सक्षम है तो स्तनपान कराएं या ओवुलेशन और एस्ट्रोजन गतिविधि को कम करने में मदद करता है।
  3. असामान्य रक्त स्त्राव का तुरंत उपचार ले।
  4. नियमित रूप से व्यायाम करें या आपकी वजन को नियंत्रित रखने और एस्ट्रोजेन का स्तर कम करने में मदद करता है।
  5. फलों और सब्जियों का अधिक से अधिक सेवन करें।

गर्भाशय कैंसर के परीक्षण

महिला मे गर्भाशय कैंसर के लक्षण दिखाई दे तो डॉक्टर मूत्र और रक्त परीक्षण की सलाह दे सकते हैं।अन्य टेस्ट इस प्रकार है।

  1. पेल्विक जांच- इसमें डॉक्टर आपके गर्भाशय, योनि मलाशय और मूत्राशय में गांठ की जांच करेंगे
  2. पैप परीक्षण- इस टेस्ट में आपके गर्भाशय ग्रीवा और योनि के ऊपरी हिस्से में असामान्य कोशिकाओं की जांच करेंगे
  3. ट्रांसवैजिनल अल्ट्रासाउंड- इसमें अल्ट्रासाउंड करके आपकी गर्भाशय की तस्वीर के माध्यम से जांच की जाती है।
  4. बायोप्सी- यह सर्जिकल कतरिया है डॉक्टर आपके एंडोमेट्रियम से कैंसर कोशिकाओं को निकाल देते हैं।

गर्भाशय कैंसर का इलाज

गर्भाशय कैंसर से पीड़ित महिलाओं को काफी परेशानियों से गुजरना पड़ता है कुछ महिलाऐ इसे लाइलाज बीमारी समझती है। पर सही समय पर अगर बीमारी का पता लग जाऐ तो इलाज संभव है।




  1. गर्भाशय कैंसर का इलाज कराने का सबसे आसान तरीका अल्ट्रासाउंड कराना है जिसमें महिलाओं के शरीर के अंदरूनी भाग की स्थिति का पता या लगाया जाता है इस टेस्ट के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि किसी महिला में यह कैंसर किस हद तक बढ़ चुका है।
  2. कई बार गर्भाशय कैंसर का इलाज बायोप्सी के माध्यम से भी किया जाता है इस सर्जरी में शरीर से कैंसर युक्त कोशिकाओं को नष्ट करने की कोशिश की जाती है ताकि शरीर के अन्य अंगों में ना फैल सके।
  3. अक्सर गर्भाशय कैंसर का इलाज करने के लिए कुछ टेस्ट जैसे सीटी स्कैन, ब्लड टेस्ट आदि जांच किया जाता है यह सभी टेस्ट महिलाओं के शरीर में कैंसर की स्थिति को सुनिश्चित करने में सहायक साबित हो सकते हैं
  4. वर्तमान समय में रेडिएशन थेरेपी काफी प्रचलन में है इसका उपयोग शरीर में कैंसर युक्त टिशू को नष्ट करने के लिए किया जाता है रेडिएशन थेरेपी का उपयोग गर्भाशय कैंसर का इलाज करने के लिए भी किया जाता है।
  5. जब गर्भाशय कैंसर से पीड़ित महिला को किसी भी तरीकों से आराम नहीं मिलता है तो उस स्थिति में डॉक्टर महिला को हिस्टरेक्टोमी सर्जरी कराने की सलाह देते हैं इस सर्जरी में महिला के गर्भाशय का कैंसर का इलाज मेडिकल तरीके से किया जाता है।
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