गर्भावस्था का दूसरा महीना

गर्भावस्था का दूसरा महीना – लक्षण, शारीरिक बदलाव और देखभाल

किसी महिला के लिए प्रेगनेंसी जितनी खास है उतनी ही नाजुक भी। हर महिला के लिए गर्भावस्था का समय बिलकुल एक नया अनुभव होता हैं। गर्भावस्था के दौरान अधिकतर महिलाओ को बहुत सी मानसिक व शारीरिक समस्याओ का सामना भी करना पड़ता हैं। जैसे की उलटी होना, शरीर में दर्द रहना, नींद ना आना आदि। ऐसा माना जाता है की गर्भावस्था की पहली तिमाही काफी मुश्किल होती है क्योंकि इस समय पर गर्भपात होने का खतरा ज्यादा होता हैं। इस लेख के माध्यम से आज हम गर्भावस्था के दूसरे महीने के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे।

इस लेख में आप पढ़ेंगे की गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान महिलाओ के शरीर में क्या क्या बदलाव आते है? ऐसे में आपको क्या क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और किन बातों को खास कर ध्यान रखना चाहिए।

  • प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में शरीर में बदलाव
  • गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या करें?
  • गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या ना करें?
  • गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
गर्भावस्था का दूसरा महीना
गर्भावस्था का दूसरा महीना

प्रेग्नेंसी के दूसरे महीने में शरीर में होने वाले बदलाव

  • गर्भावस्था के दूसरे महीने में गर्भाशय का आकार पहले से बढ़कर एक संतरे के जितना हो जाता है।
  • प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में हर थोड़ी देर में कुछ खाने का मन करता है।
  • गर्भावस्था के दूसरे महीने में आपको योनि में खुजली, दर्द व हलके रक्त स्त्राव की शिकयत भी हो सकती है।
  • प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में अधिकतर महिलाओ का वज़न पहले से थोड़ा बढ़ जाता है।
  • वैसे तो हर गर्भवती महिला का अनुभव अलग होता है पर अधिकांश महिलाओ को इस दौरान कई चीजोंं की गंध पसंद नहीं आती।
  • प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में गर्भाशय के फैलने के कारण आपको बार-बार पेशाब आता है।
  • कई महिलाए प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में सीने में जलन की शिकायत भी करती है।
  • गर्भावस्था के दौरान आपका शरीर में कई बदलाव आते है जिसके कारण आपको सांस लेने में तकलीफ़ भी हो सकती है।
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गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या करें?

  • खूब पानी पिए
  • पौष्टिक भोजन
  • पर्याप्त नींद लें
  • फोलिक एसिड और अन्य अनुपूरक
  • स्तनों में भारीपन
  • व्यायाम

खूब पानी पिए

गर्भावस्था में पहले से अधिक तरल पदार्थ पिए और खुद को हाइड्रेट रखें। गर्भावस्था के दौरान कब्ज जैसी समस्या से बचने के लिए दिन भर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिए।

पौष्टिक भोजन

गर्भावस्था में पौष्टिक भोजन आपकी और आपके शिशु की सेहत के लिए बहुत जरुरी है। अपने दैनिक आहार में अधिक से अधिक मात्रा में रेशेदार भोजन शामिल करें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धो कर ही खाये। एक ही बार में इकठा भोजन ना करके दिनभर में थोड़ा-थोड़ा और कई बार खाती रहे इससे आपको भोजन पचाने में आसानी होगी।

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पर्याप्त नींद लें

गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त नींद करना आवश्यक है। ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें। पर्याप्त नींद आपके और होने वाले शिशु दोनों के लिए अच्छा है।

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फोलिक एसिड और अन्य अनुपूरक

डॉक्टर की सलाह से फोलिक एसिड और अन्य अनुपूरक लेते रहें।

स्तनों में भारीपन

गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान स्तनों में भारीपन हो सकता है, इसलिए सपॉर्टिव ब्रा पहन सकती हैं।

व्यायाम

गर्भावस्था के दूसरे महीने में पैदल चले या सैर करे। आप हल्के फुल्के एक्सरसाइज भी कर सकते है।

गर्भावस्था के दूसरे महीने में क्या ना करें?

गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान अपने व शिशु के स्वास्थ्य के लिए निचे लिखे पॉइंट्स जरूर फॉलो करे।

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  • अधिक तैलीए पदार्थ ना खाये और जंक फ़ूड से बिलकुल परहेज़ करें।
  • यदि आप धूम्रपान करती हैं या शराब पीती हैं तो इन्हे तुरंत छोड़ दें।
  • डॉक्टर से बिना पूछे कोई भी दवा ना लें। ऐसा करना आपके शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है।
  • खाली पेट बिलकुल ना रहें, खाली पेट रहने से जी मिचलाने और उलटी आने की समस्या बढ़ सकती है।

गर्भावस्था के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां

गर्भावस्था के दौरान सभी महिलाए अलग अलग तरह की परेशानी से गुजरती है। ऐसा पूरी तरह से उस महिला के हॉर्मोन्स पर निर्भर करता हैं। गर्भावस्था के दौरान हर महिला को बहुत सी सावधानी बरतनी पड़ती हैं ताकि होने वाले बच्चे के साथ साथ खुद की सेहत पर भी कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़े। गर्भावस्था के समय आपकी थोड़ी सी असावधानी कई बार शिशु के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं। प्रेगनेंसी के दौरान आपको निचे लिखी बातो पर ध्यान देना चाहिए।

गर्भावस्था का दूसरा महीना
गर्भावस्था का दूसरा महीना
  • ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए
  • ज्यादा विटामिन-सी का उपयोग न करें
  • भारी सामान ना उठाए
  • ज्यादा भाग दौड़ ना करे
  • गरम चीजो का सेवन नहीं करना चाहिए
  • सम्भोग करते समय सावधानी बरते
  • ज्यादा मसाले व् बाहर के खाने से परहेज रखना चाहिए
  • भारी सामान नहीं उठाना चाहिए

ज्यादा व्यायाम ना करे

गर्भावस्था से पहले जिम जाने वाली महिलाओ को गर्भावस्था के दौरान जिम नहीं जाना चाहिए। ज्यादा एक्सरसाइज करने से कई बार पेट से जुडी समस्या हो सकती हैं। जिम जाने से आप थक जाएंगी जबकि इस अवस्था में आपको आराम करना चाहिए।

ज्यादा विटामिन-सी का उपयोग न करें

गर्भावस्था के दौरान महिलाओ को अधिक मात्रा में विटामिन-सी वाले पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए। जैसे की पपीता, स्ट्रॉबेरी, ब्रोकली आदि। अधिक मात्रा में विटामिन सी कहने से गर्भपात होने का खतरा बढ़ जाता हैं।

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भारी सामान ना उठाए

गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान महिलाओ को गलती से भी भारी सामान को नहीं उठाना चाहिए। भारी सामान उठाने से पेट पर ज्यादा दवाब पड़ता है जिससे ब्लीडिंग का खतरा हो सकता हैं। गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान भारी सामान उठाने से पेट में दर्द हो सकता हैं।

ज्यादा भाग दौड़ ना करे

गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान महिलाओ को ज्यादा भाग दौड़ नहीं करनी चाहिए। ऐसी अवस्था में केवल आराम करे, अधिक भाग दौड़ करने से आपको थकान आदि की समस्या हो सकती हैं। इतना ही नहीं सीढ़ियों का प्रयोग सोच समझ कर करे। एक दम भाग कर सीढ़िया ना चढ़े ऐसा करने से पेट पर सीधा असर पड़ता हैं। आराम से सीढिया चढ़े ताकि गिरने या फिसलने की सम्भवना न हो।

गरम चीजो का सेवन नहीं करना चाहिए

गर्भावस्था के दूसरे महीने के दौरान समय में गरम पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए। जैसे की ज्यादा ड्राई फ्रूट्स, तिल, आड़ू, आम आदि । गरम पदार्थो के सेवन से गर्भपात का खतरा होता है इसीलिए गर्भावस्था के दौरान खास कर पहली तिमाही में आपको गरम चीजो से परहेज करना चाहिए।

सम्भोग करते समय सावधानी बरते

बिना डॉक्टर के सलाह के सम्भोग न करें। गर्भावस्था के दौरान सेक्स करने में कई बार परेशानी हो सकती हैं। खासकर जिन महिलाओ को काफी परेशानियों के बाद माँ बनने का अनुभव मिल रहा हो उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

ज्यादा मसाले व् बाहर के खाने से परहेज रखना चाहिए

गर्भावस्था के दौरान बाहर के खाने व् ज्यादा तले हुए और मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए। ज्यादा मिर्च या तेज मसाले व् ज्यादा तले हुए भोजन से पेट में दर्द जैसी समस्या हो सकती हैं। इसीलिए गर्भवती महिला को पोष्टिक आहार ही खाना चाहिए जो आपके लिए और आपके गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए ही फायदेमंद हो।

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