अनियमित मासिक धर्म क्यों और क्या है उपाय

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मासिक धर्म या माहवारी स्त्री जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। यह संपूर्ण प्रजनन स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इतनी महत्वपूर्ण चीज़ होने पर भी बहुधा महिलाओं के लिए मासिक धर्म उत्साहपूर्ण इसलिए नहीं होती क्योंकि उन्हें कई बार अनियमित मासिक धर्म के चलते होने वाली समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि अनियमित मासिक धर्म क्या है? इसकी समस्याएं और इसके उपचार क्या हो सकते हैं?

सामन्यतः माहवारी अनियमित होने के कारण और उनके लक्षणों से जुड़ी छोटी-मोटी परेशानियां होना आम बात है। आमतौर पर यह हार्मोनल असंतुलन का संकेत होती है। एक सही मासिक चक्र लगभग 28 दिन का होता है जिन महिलाओं को 29 वें दिन पर मासिक धर्म हो जाता है तो उनका मासिक चक्र एकदम सही होता है। लेकिन अगर आपको 21 दिनों में या उससे पहले मासिक धर्म शुरू हो जाते हैं या आप की महावारी 8 दिनों से अधिक समय तक रहती है तो आप अनियमित मासिक धर्म की समस्या से ग्रस्त हैं। आज अनियमित महावारी करीब करीब 35% महिलाओं की समस्या बन चुकी है। वैसे कभी कभार अनियमितता आम बात है पर हां कुछ असमान्य जैसा लगे या चक्र में देरी कुछ ज्यादा ही बढ़ जाए तो यह चिंता का विषय हो सकता है। आपका उस स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना ही बेहतर विकल्प है। वैसे तो अनियमित माहवारी के कई कारण हो सकते हैं जो कई बार बहुत गंभीर भी नहीं होते हैं। अक्सर देखा गया है कि यह अनियमित माहवारी की परेशानी अक्सर किशोरावस्था में लड़कियों को ज्यादा होती है जिनमें मासिक धर्म की अभी शुरुआत ही हुई हो। किशोरावस्था में लड़कियों को अनियमित मासिक धर्म के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह एक आम बात है। उसके अलावा अनियमित महावारी के कई सामान्य कारण हो सकते हैं जैसे

अचानक वजन का बढ़ना या घटना – कम समय में वजन में बहुत ज्यादा वृद्धि या घटाव होने के कारण भी शारीरिक हार्मोन के सामान्य कार्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

तनाव का बढ़ना – तनाव का उच्च स्तर महावारी के दौरान ओवुलेशन यार्ड इनबर्सटर्स को रोक सकता है। एस्ट्रोजन और अन्य प्रजनन हार्मोन का उत्पादन भी तनाव के कारण बाधित हो जाता है नतीजा आपकी गर्भाशय की परत उस तरह से नहीं बनती जैसे उसे बननी चाहिए जिसकी वजह से भी मासिक धर्म समय पर नहीं होता है।
आहार में पोषण की कमी – जिस आहार में एंटी ऑक्सीडेंट की कमी होती है वह हर किसी भी महिला के शरीर में विभिन्न हार्मोन के सामान्य कार्य में विघ्न डाल सकता है परिणाम स्वरूप इसी कारण से मासिक धर्म अनियमित हो सकता है।
थायराइड- थायराइड की समस्या से पीड़ित महिलाओं का मासिक धर्म अक्सर डूब जाता है या उन्हें अनियमित मासिक धर्म का सामना करना पड़ता है।

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माहवारी में ज्यादा एक्सरसाइज – माहवारी के दौरान तनावपूर्ण व्यायाम करने से यह देखा गया है कि अधिक व्यायाम के कारण होने वाला तनाव या थकान अधिवृक्क, थायराइड और पिट्यूटरी ग्रंथियों के सामान्य कार्य में बाधा उत्पन्न करता है जिससे मासिक धर्म अनियमित हो जाता है।

बर्थ कंट्रोल पिल्स का इस्तेमाल – गर्भनिरोधक गोलियों से मासिक धर्म पर सीधा असर पड़ता है या महावारी को कम करता है और कई मामलों में तो इसे पूरी तरीके से रोक देता है।

पी.सी.ओ.एस- पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम यानी पीसीओएस ऐसी चिकित्सा संबंधी स्थिति है जिसमें अंडाशय में बहुत सारी छोटे छोटे सीस्ट दिखाई देते है। इसी स्थिति से पीड़ित महिलाओं को भी अनियमित मासिक धर्म का अनुभव होता है।

इन सब कारणों के अलावा अन्य चिकित्सीय स्थितियां जैसे मधुमेह फाइब्रॉयड, एंडोमेट्रियोसिस और यौन संचारित रोगों जैसे चिकित्सा संबंधी स्थितियों से पीड़ित किसी भी महिला को अनियमित मासिक धर्म का अनुभव होने की सबसे अधिक संभावना होती है। उम्र भी एक फैक्टर हो सकता है। यह देखा गया है कि जब किसी लड़की को पहली बार मासिक धर्म होता है तो उसे सामान्य होने में कुछ समय लगता है और केवल उम्र के साथ ही महिलाओं में मासिक धर्म चक्र नियमित होता है।

आइये यहां जाने पीरियड्स को रेगुलर करने के कुछ घरेलू तरीकों के बारे में:-

आयुर्वेद की मानें तो महिलाएं अपने खान-पान और जीवनशैली में बदलाव करके अनियमित माहवारी की इस समस्या से निजात पा सकती हैं। जैसे महावारी के दौरान तला हुआ और गरिष्ठ भोजन जो कि पचने में आसान ना हो नहीं करना चाहिए। बहुत ज्यादा मसालेदार खाना और चाय कॉफी भी नुकसानदायक होता है।
दालचीनी का इस्तेमाल इस तकलीफ को ठीक करने में रामबाण साबित हो सकता है। दालचीनी इस्तेमाल करने के लिए एक कप पानी में एक चम्मच दालचीनी पाउडर उबालें जब पानी आधा रह जाए तो छान कर पी सकते हैं।

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आप देसी घी खाएं। घई आप दाल में डालकर खा सकते हैं, सब्जी में खा सकते हैं या फिर रोटी पर लगाकर खा सकते हैं।
अदरक और सौंठ दोनों पीरियड्स को नियमित करने में सहायक माने जाते हैं। एक तो अदरक की तासीर गर्म होती है जिसकी वजह से पीरियड का फ्लोर सही रहता है और दूसरा अदरक पेट को आराम देती है। अदरक को आसानी से कच्चा खाया जा सकता है लेकिन उससे भी आसान तरीका है एक बढ़िया अदरक वाली चाय पीना, यह उतना ही फायदा करेगी।

चुकंदर खाने से वैसे भी शरीर में ब्लड सेल्स यानी रक्त कोशिकाएं बनती है लेकिन इसके अलावा चुकंदर में आयरन और फोलिक एसिड भी पाया जाता है और दोनों ही मासिक धर्म की अनियमितता को दूर करने में मदद करते हैं। चुकंदर हारमोंस को असंतुलित करने से बचाता है। चुकंदर को आप सलाद के रूप में खाए या इसका जूस पिए।

इमली या खट्टे पदार्थ जिन्हें वैसे तो माना जाता है कि महावारी के दौरान खट्टा खाने से बचना चाहिए परंतु अनियमित महावारी के मामले में इमली का गूदा जादू कर सकता है। आप उसे पानी में भींगा कर फिर उसे छानकर उसमें थोड़ी-सी चीनी नमक और जीरा पाउडर मिलाकर चटनी बना सकते हैं या फिर उसे जूस जैसे भी पी सकते हैं, फर्क़ आप खुद महसूस करेंगे।
कच्चा पपीता माहवारी के कारण होने वाली समस्याओं को दूर करता है। पपीते में मौजूद आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए और सी गर्भाश्य को फायदा पहुंचाने का काम करते हैं। कच्चा पपीता आप नाश्ते में कुछ महीने तक खाएंगे तो उसका फायदा जरूर होगा।

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इसके अलावा साफ सफाई का विशेष ख्याल रखें। अनियमित मासिक धर्म के लिए कुछ और भी घरेलू उपचार है जो इस स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं जैसे कि यदि आपके मासिक धर्म का चक्र का कारण तनाव है तो आप तनावमुक्त जीवन के लिए योगा मेडिटेशन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। नियमित योग वैसे भी बहुत सारी परेशानियों का हल होता है। इससे आप कई तरह की बीमारियों से बचे रहते हैं। साथ ही यह मासिक धर्म की अनियमितता से पीड़ित महिलाओं के लिए भी लाभदायक साबित होता है।

हमेशा संतुलित और पौष्टिक आहार लें। यदि उपरोक्त सभी उपचारों और उपायों को आजमाने के बाद आप में कोई सुधार नहीं हुआ है और यदि आप कुछ समय से गर्भवती होने की कोशिश कर रही है लेकिन ऐसा करने में असमर्थ हैं तो आपको डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है क्योंकि अनियमित मासिक धर्म चक्र इसका कारण हो सकता है। हाँ अनियमित मासिक धर्म गर्भावस्था को प्रभावित करता है। क्योंकि अनियमित मासिक धर्म का मतलब है कि आप हर महीने डिंब उत्सर्जन नहीं कर रही है तो इससे आपकी गर्भावस्था पर सीधा असर पड़ता है। अनियमित मासिक धर्म होना एंडोमेट्रियोसिस, पीसीओएस या थायराइड जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण भी हो सकते हैं। इसलिए यदि आप लंबे समय से अनियमित मासिक धर्म से पीड़ित है डॉक्टर से परामर्श लेना और मूल्यांकन करना उचित होगा। अनियमित माहवारी डिंबग्रंथि के कैंसर का लक्षण हो ऐसा जरूरी नहीं है लेकिन आप समय समय पर चिकित्सीय परीक्षण करवा सकतीं है। रयूमेटाइड गठिया भी अनियमित मासिक धर्म का कारण हो सकता है। इसके बारे में डॉक्टर से परामर्श ले और होने या ना होने की पुष्टि की जांच कर ले।

सबसे जरूरी यह है कि माहवारी या मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं के बारे में खुल कर बात करना और परामर्श लेना चाहिए जिससे उनकी समस्या का समाधान मिले। आइये मिल कर महिलाओं के जीवन को सुगम और सुखद बनाए।

-Sushma Tiwari

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