जैतून के तेल की मालिश

कैसे करें जैतून के तेल की मालिश

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दोस्तों किसी भी तेल से हमारे शरीर की मालिश के बारे में जानने से पहले हमारे लिए ये जानना जरूरी है कि तेल मालिश होती क्या है, तो आइए जानते हैं तेल मालिश के बारे में:

तेल मालिश: हमारा खान, सुबह शाम की वॉक, एक अदद नौकरी जिस प्रकार हमारी जिंदगी की सहूलियत के लिए जरूरी है, ठीक उसी तरह मानवीय शरीर को सांसों के अंत तक पीड़ा मुक्त, रोग मुक्त रखने के लिए तेल मालिश अत्यंत आवश्यक है, वरन जोड़ों का दर्द (ज्वाइंट पेन) का विकार उत्पन्न हो जाने के कारण न हम ठीक से चल सकते हैं, न ही उठ बैठ सकते हैं। यहां तक कि हमारे दैनिक कार्य भी जोड़ों के दर्द और शरीर की कमजोरी के कारण बाधित हो जाते हैं।

तेल मालिश द्वारा हमारे शरीर को और भी अनेकानेक लाभ हैं, जिन्हें हम निम्नलिखित रूप में समझ सकते हैं:

  • त्वचा में चमक आती है।
  • रक्तचाप प्रवाह उचित रहता है।
  • शरीर की मृत कोशिकाएं सजीव होती हैं।
  • सर्दियों में शरीर की तेल से मालिश किए जाने से शीत का शरीर पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • पाचन प्रणाली दुरुस्त रहती है।
  • पेट साफ रहता है।
  • आंतें, दिल, फेफड़े और यकृत को शक्ति मिलती है।
  • शरीर के पुराने विकार को तेल मालिश से दूर किया जा सकता है।
  • शरीर के बन्द हुए समस्त रोम छिद्र खुल जाते हैं।
  • मालिश से त्वचा में चमक उत्पन्न होने के कारण किल मुंहासे निकलने भी बन्द हो जाते हैं।

तेल मालिश के अनेकानेक लाभ देखते हुए ही नवजात शिशु के जन्म से ही तेल मालिश प्राचीनतम काल से महत्वपूर्ण समझी जाती है।

मालिश करते समय रखी जाने वाली सावधानियां

किसी भी कार्य के करने का अपना एक विशेष तरीका होता है, और यही सिद्धांत तेल मालिश किए जाने के समय में भी लागू होती है, अन्यथा अनुचित तरीके से की गई तेल मालिश शरीर को लाभ के स्थान नुकसान पहुंचा देती है। अतः हमें इन बातों को विशेष रूप में अमल करना चाहिए:

  • तेल मालिश की शुरुआत सिर से की जानी चाहिए।
  • बच्चों की मालिश करते समय हलके हाथों से दबाव देकर मालिश की जानी चाहिए, क्योंकि बच्चों का शरीर बहुत नाज़ुक होता है और यदि हम उनके नाज़ुक शरीर पर सख्त हाथों से मालिश करेंगे तो उस स्थान पर मोच अथवा दर्द हो सकता है।
  • शरीर की मालिश करते समय यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि मालिश के लिए शरीर में अनुप्रयोग लाए जा रहे तेल को अच्छी प्रकार से अवशोषित किया जाए, इस प्रकार मालिश का अत्यधिक लाभ होगा।
  • किसी घाव अथवा दर्द वाले स्थान पर मालिश नहीं करनी चाहिए, अन्यथा शरीर का वह हिस्सा पहले से अत्यधिक पीड़ादायक हो जाएगा।
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शरीर की मालिश हेतु उपयोग में लाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के तेल:

  • नारियल तेल
  • तिल का तेल
  • अरण्डी का तेल
  • सरसों का तेल
  • जैतून का तेल
  • अलसी का तेल

अधिकांशतः उपरोक्त तेल ही शरीर की मालिश हेतु उपयोग किए जाते हैं, मगर मालिश के उच्चतम लाभ को देखते हुए तथा जैतून के तेल की महत्ता को दृष्टिगत रखते हुए अधिकांश लोग इसको ही मालिश के लिए उत्तम तेल के रूप में मालिश के लिए अनुप्रयोग में लाते हैं।

जैतून का तेल मालिश में किस तरह फायदेमंद है:

जैतून के तेल में पोषण से भरपूर गुण होते है, यह न केवल आहार में इस्तेमाल करने के तौर पर ही फायदा करता है बल्कि जैतून के तेल (ऑलिव ऑयल) से मालिश किए जाने पर हमारे शरीर की हड्डियों के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करता है, या यूं कहें कि बीमारियों से सुरक्षा के लिए यह तेल किसी ढाल से कम नहीं है। इसके नियमित मालिश से बच्चे हों, जवान हों या फिर बूढ़े व्यक्ति…सभी उम्र के व्यक्तियों की हड्डियों की मजबूती के लिए रामबाण का काम करता है। यह तेल हड्डियों से सम्बन्धित बीमारी जिसको ऑस्तियोपोरोसिस कहा जाता है, उससे हमारे शरीर का बचाव करता है। इस दृष्टि से जैतून के तेल से शरीर पर मालिश और ज्यादा महत्व रखती है।

शरीर में कहीं सूजन महसूस होने पर उस स्थान में यदि नियमित रूप से जैतून का तेल लगाया जाए तो सूजन से छुटकारा मिल जाता है।

अगर जन्म से ही छोटे बच्चों की मालिश जैतून तेल से की जाती है, तो उनका शारीरिक विकास पूर्णतः सही प्रकार से होता है, शारीरिक विकलांगता या दुर्बलता का दोष शरीर में असम्भव हो जाता है।

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विटामिन डी मानव शरीर के लिए अत्यंत आवश्यक होता है, यदि कुछ कारणों से हम सूर्य की उपस्थिति का लाभ लेते हुए उससे प्राकृतिक विटामिन डी प्राप्त नहीं कर पाते हैं, तो इसके विकल्प के तौर पर हम जैतून का तेल उपयोग में ला सकते हैं

जैतून के तेल का उपयोग सिर की मालिश में उपयोग करने से सिर की त्वचा पर रूसी/खुश्की की समस्या उत्पन्न नहीं होती है। जैतून के तेल से सिर की मालिश किए जाने से असमय बालों का झडना भी बन्द होता है।

नवजात बच्चों के शरीर पर जैतून के तेल से मालिश किए जाने पर बच्चे भरपूर नींद लेते हैं, जिस कारण उनकी उम्र वृद्धि के साथ ही अक्सर बच्चों में होने वाला चिड़चिड़ेपन वाला व्यवहार होने की संभावना भी नहीं होती है।

जैतून का तेल मांशपेशियों के लिए बेहतर दवा का काम करता है, मांशपेशियों में महसूस हो रही कमजोरी या पैर में कहीं पर कोई मोच आ जाए तो जैतून का तेल उपयोग में लाना उचित रहता है।

उपरोक्त गुणों को देखते हुए हमने जाना कि जैतून का तेल समग्र खूबियों से युक्त है, जिसकी मालिश हमारे शरीर को उम्र भर स्वस्थ व दुरुस्त रखती है।

– Mrs. Kala Aarush Naithani
Dehradun

 

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