इन घरेलू तरीकों को अपनाने से होगी नॉर्मल डिलीवरी – Home Remedies For Normal Delivery In Hindi

जब भी आप किसी के माँ बनने की खबर सुनती है तो आपका सबसे पहला सवाल होता है, सिजेरियन हुआ या नार्मल । अगर आपका जवाब सिजेरियन हुआ तो सामने से एक सहानुभूति भरी टिप्पणी आएगी ऐसा क्यों है? क्योंकि नार्मल डिलीवरी सिजेरियन से कई मायनों में बहुत बहुत बेहतर है। ना केवल वर्तमान बल्कि भविष्य में भी ये माँ के जीवन के लिए फायदेमंद होती है।

तो सबसे पहले जानते है नार्मल डिलीवरी के क्या फायदे है और ये क्यों सिजेरियन से बेहतर है।

Normal delivery ke fayde

  • नॉर्मल डिलीवरी के बाद माँ शिशु को तुरन्त और आसानी से ब्रैस्ट फीड करा सकती है। जिससे बच्चा स्वस्थ रहता है।
  • जबकि सिजेरियन में ये माँ के लिए थोड़ा दर्दभरा होता है।
  • नार्मल डिलीवरी में रिकवर होने में सिजेरियन के मुकाबले कम समय लगता है
  • सी सेक्शन तरह की चीर फाड़ नही होती जिससे जच्चा को डिलीवरी के बाद दर्द नही सहना पड़ता

नॉर्मल डिलीवरी में लगने वाला समय  Normal delivery me lgne vala samay

  • ये पूरी तरह से महिला की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है।
  • दर्द कब शुरू हुए?कब तक हुए?इन सब बातों के अलावा, डिलीवरी पहली है या दूसरी
  • दूसरी डिलीवरी थोड़ा जल्दी हो जाती है, पहली डिलीवरी में 6-7 घण्टे लग सकते है।

पहली सिजेरियन तो क्या दूसरी भी?

नही ऐसा जरूरी नही है, कई केसेस में पहली डिलीवरी सिजेरियन होने के बाद भी दूसरी डिलीवरी नॉर्मल हुई है। पर इसके लिए पहली डिलीवरी के बाद पूरा प्रीकॉशन लिया गया हो, और महिला की शारीरिक स्थिति पूरी तरह दुरुस्त हो।

क्या जुड़ाव बच्चे होने पर नॉर्मल डिलीवरी हो सकती है?

बिल्कुल जुड़वां बच्चे होने पर भी नार्मल डिलीवरी हो सकती हैं।

नार्मल डिलीवरी की मुश्किलें Normal delivery ki mushkile

  • वैसे तो इसमें कोई दिक्कत नही होती पर कई बार डिलीवरी टाइम पर बच्चे की धड़कन घट बढ़ जाना.
    प्लेसेंटा टूट जाना, बहुत ज्यादा ब्लीडिंग या वाटर बैग फट जाना जैसी इमरजेंसी आ जाती हैं जिससे डॉक्टर को अचानक सिजेरियन का फैसला लेना पड़ता है।

कैसे अंदाज़ लगे कि नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस है।

महिला का शरीर कुछ संकेत देता है जिससे ये समझ सकते है कि डिलीवरी नॉर्मल होगी, ये संकेत नार्मल डिलीवरी की गारंटी नही देते लेकिन सम्भावना को बढ़ा देते है।

  • अगर 30वे से 34वे सप्ताह में बच्चे का सिर नीचे की तरफ हो जाए।
  • महिला को कोई स्वास्थ्य सम्बन्धी गम्भीर बीमारी ना हो।
  • गर्भवती महिला का वजन जरूरत से ज्यादा ना हो।
  • यदि गर्भवती महिला की पहली डिलीवरी सामान्य रही हो
  • बच्चा बार बार योनि पर प्रेशर डाले।
  • गुदाद्वार की मांसपेशियां ढीली लगे और पतला मल हो।
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नार्मल डिलीवरी में कितना दर्द होता है?
(Normal delivery me kitna dard hota hai)

नार्मल डिलीवरी के भाग (Normal delivery ke bhag)

नॉर्मल डिलीवरी के 3 चरण होते है और पहले चरण के भी तीन भाग होते है।

1-लेटेंट प्रक्रिया

डिलीवरी से एक सप्ताह या कुछ घण्टो पहले महिला को बीच बीच मे संकुचन महसूस होता है।
सर्विक्स 3cm तक खुल जाता है। इस समय महिला बीच मे आराम करें, थोड़ा घूमे, अकेली ना रहे।

2-एक्टिव प्रक्रिया

इस चरण में सर्विक्स 3 से 7cm तक खुल जाती है। तेज दर्द महसूस होने लगता है। महिला सांसों के व्यायाम शुरू कर दे खुद को रिलैक्स करे।

3-ट्रांजिशन प्रक्रिया

सर्विक्स 8 से 10cm तक खुल जाती है, संकुचन तेज हो जाता है। महिला अस्पताल जाने की तैयारी कर ले ।

दूसरा चरण

सर्विक्स पूरी तरह खुल जाती है, शिशु का सिर नीचे आ जाता है। डॉक्टर लगातार महिला को स्वयं से जोर लगाने को कहते है।
जैसे ही बच्चे का सिर बाहर निकलता है डॉक्टर बच्चे को बाहर खींच लेते है। इस समय महिला सांसों पर ध्यान दे और बच्चे को बाहर की तरफ पुश करे।

तीसरा चरण

बच्चे के बाहर आते ही डॉक्टर कॉर्ड को काट देते है, इस समय प्लेसेंटा भी वोम्ब(गर्भाशय) की दीवार से अलग होने लगती है।
इस समय भी महिला को संकुचन होते है और डॉक्टर निर्देश देते है कि महिला खुद से जोर लगाए।

नार्मल डिलीवरी के उपाय (normal delivery ke upay)

ये है कुछ उपाय जिन्हें अपनाकर गर्भवती महिला अपने नार्मल डिलीवरी के चान्सेस को बढ़ा सकती है।

खानपान

  • गर्भावस्था में वजन बढ़ना सबसे सामान्य बात है लेकिन गर्भवती महिला को अपना वजन जरूरत से ज्यादा नही बढ़ने देना चाहिए।
  • गर्म तासीर वाली चीज़े जैसे पपीता, चीकू, नही खानी चाहिए गैस अपच से बचने के लिए भारी और तला हुआ कम से कम खाए।
  • जंक फूड, कैफीन, एल्कोहल, छोड़ दे। जरूरत से ज्यादा मीठा भी आपको नुकसान करेगा विटामिन्स और मिनरल्स का सेवन अच्छे से करना चाहिए।
  • फोलिक एसिड युक्त पदार्थ, हरि सब्जियां, विटामिन c, और चावल आदि का सेवन शुरू कर देना चाहिए ।
  • विटामिन और मिनरल्स से भरपूर चीज़े खाए, पोषक तत्वों से भरपूर सब्जियां और फल खाए।
  • डेयरी प्रोडक्ट के साथ साथ रेड मीट, हरी सब्जियां खाए।
  • कैल्शियम, प्रोटीन, आयरन से बच्चे के मसल्स, ऊतकों और हड्डियों का विकास होता है।
  • हैल्थी खाने से हार्मोनल बदलाव से होने वाली समस्याए भी दूर होती है।
  • डॉक्टर ने फोलिक एसिड का जो सप्पलीमेंट दिया है वो रेगुलर लेती रहे।
  • जिंक का सेवन बढ़ा दे, कम से कम 15 मिलीग्राम रोज ले, साबुत अनाज, सूखे मेवे जिंक के अच्छे स्त्रोत है।
  • इसकी कमी से प्रसव में दिक्कत हो सकती है।
  • दूध, दही, पनीर, साबुत अनाज, दाल, हरी सब्जियां, विटामिन c वाले फल, खूब पानी पिएं, छटे हफ्ते में कम से कम 1000मिलीग्राम कैल्शियम का सेवन करना चाहिए।
  • सुबह निम्बू पानी या नारियल पानी पिए,  ब्रोकली, भिंडी, दाल, पालक, एवाकाडो खाए
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क्या ना खाएं

  • वजन बढ़ाने, गैस्ट्रिक, ज्यादा मीठा, ज्यादा नमक ना खाएं।
  • मछली, सोयापनीर, माँस, अंडा, मीट, चिकेन, बीन्स, टोफू खाए अधपका माँस, कच्चा अंडा, पपीता, सी फूड, कुकीज, केक, डोनट्स, जैतून, कनोला, मक्का का तेल, नट, बीज का सेवन ना करे।

मानसिक तैयारी

सबसे पहले तनाव को कोसो दूर रखें, क्या होगा कैसे होगा ये सोचना छोड़ दे। मेडिटेशन करे, म्यूजिक सुने, अपनी हॉबी चाहे वो लिखने की हो, चित्रकारी की हो उसे पूरी करें। नेगेटिव लोगो को इग्नोर करें। सकारात्मक बने, अगर कोई आपको अपनी दर्दभरी डिलीवरी की कहानी सुनाए तो वहाँ से हट जाए। मानसिक स्थिति का असर आपके बच्चे पर होगा इसलिए नकारात्मक विचारों से दूर रहे ये आपके होने वाले बच्चे के लिए ठीक नही है। काम के लिए भागदौड़ या जल्दबाजी ना करे।बुरी आदतों को छोड़ दे।
खुश रहे, सुबह सुबह नंगे पैर हरी घास पर चले।

सबके अपने अपने अनुभव होते है जरूरी नही जो दुसरो के साथ हुआ वो आपके साथ भी होगा। ऐसा डॉक्टर चुने जो स्वंय से आपको c सेक्शन के लिए ना उकसाये आप प्रीनेटल क्लासेस ले सकती है, कोई भी शंका मन मे ना रखें ।
अपने डॉक्टर से हर प्रश्न का जवाब समझे, गर्भावस्था से सम्बंधित किताबे पढ़े।

व्यायाम

सबसे पहले तो ये बात ध्यान रखे कि आप अच्छी और गहरी नींद ले। किसी भी काम के लिए नींद से कोम्प्रोमाईज़ ना करे।
शरीर मे पानी की कमी बिल्कुल ना होने दे, खूब पानी पिएं। आप नारियल पानी भी ले सकती है। जरूरत से ज्यादा वजन ना बढ़ने दे।

पेरिनियम मसाज

पेरिनियम मसाज
पेरिनियम मसाज

 

इस मालिश को गर्भवती महिला 34वे सप्ताह से शुरू कर सकती है। दिन में 2 से 3 बार कम से कम 5 मिनट के लिए ये मसाज करें। इससे सामान्य प्रसव में सहूलियत होगी। एक दीवार का सहारा लेकर बैठ जाये, पैरो को आगे रखे। अब हाथों को अच्छे से साफ करें, बादाम या नारियल का तेल अंगूठे पर लगाएं। अब अंगूठे को लगभग 2 से 2.5cm अंदर योनि में डालकर धीरे धीरे मसाज करें। बाकी की उंगलियों को नितम्बो पर रखे।

पोस्चर का ध्यान रखे

  • अगर आप रोजमर्रा के कामो में अपने पोस्चर का ध्यान रखेंगी तो उससे भी काफी फायदा होगा।
  • जैसे हील ना पहने, ज्यादा देर तक बैठी ना रहे। स्पेशली पैर लटकाकर कर लम्बे समय तक ना बैठे। ज्यादा देर खड़ा होना या जरूरत से ज्यादा आराम करना भी सही नही है। वजन ना उठाए और कोई भी चीज़ उठाते हुए ज्यादा आगे ना झुके
  • हमेशा बैक पर कुछ कुशन लगाकर बैठे जिससे रीढ़ की हड्डी पर ज़ोर ना पड़े। सीढ़ियों का प्रयोग कम से कम करे या ना करे ।
  • शुरुआती हफ़्तों में आप सुबह 30 मिनट टहल सकती है ये आपके और बच्चे दोनो के लिए लाभकारी है।
  • हल्का व्यायाम करें।
  • केवल गर्भावस्था में होने वाले योग करे, सांस रोकने और पेट पर जोर डालने वाले योग और एक्सरसाइस ना करे।
  • ज्यादा उछल कूद ना करें, यात्रा से बचे।
  • थोड़ा समय बीतने पर टहलने का समय बढ़ा दे। योग्य शिक्षक की देखरेख में या उनके कहे अनुसार ही व्यायाम या योग करे।
  • पीठ के बल लेटकर करने वाली एक्सरसाइज बन्द कर दे।
  • आरामदायक पोजीशन में रहे, वार्मअप जरूर करे, हॉर्मोन शरीर को लचीला बनाते है आप वार्मअप से शरीर को और लचीला बना सकती है, ज्यादा उछल कूद न करें
  • शरीर के साथ जबरदस्ती ना करें।टहलते रहे, ज्यादा देर तक खड़े ना रहे ना खड़े होने वाली एक्सरसाइज ना करे।
  • पांचवे हफ्ते में स्विमिंग कर सकते है पर वजन उठाने वाली एक्सरसाइज ना करे
  • छटे और सातवें हफ्ते में वाटर एरोबिक्स कर सकती है
  • पेटदर्द, वेजिनल ब्लीडिंग में व्यायाम ना करें।
  • आठवें से दसवें हफ्ते में पालथी मारे दिन में 5 बार 30 सेकंड तक, इससे प्रसव पीड़ा में कमी आएगी
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एक्सरसाइज

  • गर्भवती महिला यदि एक योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में निम्न एक्सरसाइज करें तो सामान्य प्रसव की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
  • सबसे पहले ये योगासन उचित देखरेख में और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार करे।
    • मार्जरी आसान
    • कोणासन
    • वक्रासन
    • सुख भद्रासन
    • सहज पश्चिमोत्तासन
    • वीर भद्रासन
    • त्रिकोणासन
    • इनके अलावा कुछ एक्सरसाइज भी है जो बहुत लाभदायक होती है।
    • डीप स्क्वाट्स (squats) एक्सरसाइज 36वे हफ्ते के बाद ना करे, बच्चा ब्रीच पोजीशन में हो तब भी ना करे।
    • आप स्टैंडिंग पोजीशन में भी squats कर सकती है।
    • इसके लिए पैर फैला कर खड़ी हो जाए, धीरे धीरे स्क्वाट्स (squats) परफॉर्म करे।
    • इसमे घुटनो का एंगल 90 डिग्री रखे।

इसके अलावा आप क्लेम शेल एक्सरसाइज, बटक्स एक्सरसाइज, ब्रिज एक्सरसाइज, डाउनवार्ड डॉग योग भी करे।
लेकिन सब एक्सरसाइस केवल योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में करे।

सामान्य प्रसव के घरेलू नुस्खे (Samany prasav ke gharelu nuskhe)

  • आयुर्वेदिक दवा लेने से पहले डॉक्टर से कंसल्ट जरूर करे ।
  • आप अश्वगंधा, अर्जुन रसायन, तुलसी, दशमूल ले सकती है।
  • इससे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
  • नवे महीने की शुरुआत में सवा के बीज सेक ले, पानी मे उबाल लें इस पानी मे गुड़ मिलाकर पिएं।
  • सातवे महीने से अगर लहसुन के पेस्ट को दूध में गर्म करके पिए तो नार्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ जाती है।
  • ऐसा माना जाता है कि अगर प्रसव पीड़ा के समय पर काले जीरे और शहद का पेस्ट बनाकर पेट पर लगाया जाए तो पीड़ा कम होती है।
  • साथ ही नार्मल डिलीवरी भी होती है।
  • प्रसव पीड़ा के समय फिटकरी के पाउडर को पानी मे घोल कर पीने से नार्मल डिलीवरी होती है।
  • चिरचिटा या अपामार्ग की जड़ को महिला के पेट से या गले मे काले कपड़े में बांधकर लटका दे।
  • इससे प्रसव बिना पीड़ा के और नॉर्मल हो जाता है। लेकिन बच्चे का जन्म होते ही तुरंत निकाल दे अन्यथा नुकसानदेह होगा।
  • आखिरी एक या दो महीने में दूध में एक या दो चम्मच घी मिलाकर पिएं इससे गर्भाशय में चिकनाहट बनी रहेगी।
  • 5 चम्मच अरण्ड का तेल एक गिलास दूध में देने से भी सामान्य प्रसव की संभावना बढ़ जाती है।
  • सातवें महीने के बाद सूखे नारियल को रोज चीनी और घी में मिलाकर देने से भी सामान्य प्रसव होता है।
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