मातृत्व अवकाश के नियम

मातृत्व अवकाश के नियम, क्यों है जरूरत इसकी ?

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~डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को श्रेय

महिलाओं को  मातृत्व अवकाश  दिलवाने का श्रेय, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को  दिया जाता है । उन्होंने ना केवल  दलितों और श्रमिकों के लिए काम किया बल्कि महिलाओं को भी उनके अधिकार दिलवाए हैं। उन्हें सर्वश्रेष्ठ श्रम मंत्री के रूप मे भी  याद किया जाता है।
महिला श्रमिक कोष और महिला एवं बाल श्रम अधिनियम भी उनकी बदौलत बना। उनके इन कार्यो को आज पूरा देश याद करता है।

मातृत्व अवकाश की जरूरत

माँ बनना हर किसी महिला के लिये  बड़ी ही खुशी और सौभाग्य की बात होती है ।  इस मातृत्व की जिम्मेदारी को निभाते समय उसको संतान की सेहत का ध्यान रखना होता है, इसलिए बहुत सारी महिलाएं अपना कैरियर को छोड़ अपनी संतान पर ही ध्यान देती हैं। जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता छिन जाती है।  मातृत्व अवकाश अधिनियम की जानकारी हर एक कामकाजी और गैर कामकाजी सभी तरह  की स्त्रियों को होना चाहिए ताकि वह इस अधिनियम का फायदा उठा सके, अथवा भविष्य में योजना बना सके।

सोचनीय स्थिति

भारत देश में अब भी स्थिति इतनी बेहतर नहीं है, क्योंकि भारत में मातृत्व अवकाश में दिये जाने वाली वित्तीय लाभ कंपनियों एवं  संस्थानों द्वारा दिए जाते हैं जबकि कई देशों में नियोक्ता और सरकार दोनों मिलकर मातृत्व लाभ देते हैं। भारत व अन्य देशों में अकेले नियोक्ता इसका वहन करता है, इसमें भी संशोधन की आवश्यकता है क्योंकि ऐसी सूरत में नियोक्ता महिला कर्मचारी के बदले पुरुषों का चयन करते हैं।

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क्या है नियम

मातृत्व लाभ अधिनियम 1961, मातृत्व के समय महिला के रोजगार की रक्षा करता है, और मातृत्व लाभ का हकदार बनाता है,अर्थात अपने बच्चे की देखभाल के लिए पूरे भुगतान के साथ उसे काम से अनुपस्थित रहने की सुविधा देता है।

मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 के तहत मां बनने पर बच्चे की देखभाल के लिए महिलाओं को पूर्ण समय बच्चे के साथ बिताने का मौका मिलता है ताकि वह स्तनपान करा सके तथा उसकी उचित देखभाल कर सकें । क्योंकि सामान्यतया नवजात शिशुओं की इसी अवस्था में मृत्यु दर अधिक होती है इसलिए उचित देखभाल के लिए मां को वेतन के साथ ही अवकाश का भी प्रावधान किया गया है।

उल्लेखनीय है कि यह अधिनियम 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी रोजगार प्रतिष्ठानों पर लागू है। इस अवकाश मे  पहले कामकाजी महिलाओ को केवल 12 हफ्ते की मेटरनिटी लीव दी जाती थी।

संशोधन की आवश्यकता क्यों पड़ी

डब्ल्यूएचओ के अनुसार

W H O  के अनुसार किसी भी नवजात शिशु की सरवाइवल दर मे सुधार के लिए 24 हफ्तों तक ब्रेस्ट फीडिंग कराना ज़रूरी है ।
मां और बच्चे के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए कामकाजी महिलाओं को 24 हफ्ते का मातृत्व अवकाश देना जरूरी है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक बच्चों की उत्तरजीविता (सरवाइवल) दर में सुधार के लिए 24 हफ्ते तक उन्हें सिर्फ स्तनपान कराना जरुरी होता है। संगठन का यह भी मानना है कि पर्याप्त मातृत्व अवकाश और आय की सुरक्षा न होने की वजह से महिलाओं के करिअर पर बुरा असर पड़ता है।

इसके अलावा 2015 में विधि आयोग ने मूल कानून में संशोधन करके मातृत्व अवकाश की अवधि को बढ़ाकर 24 हफ्ते करने का भी सुझाव दिया था। साथ ही, बदलते समय के साथ सरोगेसी के जरिए बच्चे पैदा करने और बच्चे गोद लेने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, इसलिए ऐसी महिलाओं को भी इस कानून के दायरे में लाने के लिए यह संशोधन किया गया है।

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10 अगस्त, 2016 को प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक, 2016 के जरिए मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 में संशोधनों को अपनी कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की।
लोक सभा में मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक, 2016 प्रस्तुत किया गया जिसे सदन ने बहुमत से पारित कर दिया।

क्या क्या प्रावधान है क्या नियम परिवर्तित हुए

इस अधिनियम में संशोधन के पश्चात संगठित क्षेत्र में कार्यरत लगभग 18 लाख महिला कर्मचारियों को लाभ हुआ।

  • इस संशोधन विधेयक के संसद से पास होने के उपरांत दो बच्चों के लिए मातृत्व लाभ की सुविधा
  • 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह और दो से अधिक बच्चों के लिए 12 सप्ताह कर दिया जायेगा।
  • इसके अतरिक्त 2 बच्चों के जन्म के पश्चात बच्चे के जन्म पर 12 सप्ताह का अवकाश प्रदान किया जायेगा।
  • इस दौरान मां को घर से कार्य करने की सुविधा का प्राविधान है।
  • इस विधेयक के तहत यदि कोई महिला किसी बच्चे को गोद लेती है तो उसे भी 12 सप्ताह का अवकाश प्रदान किया जायेगा।
  • सरोगेसी से संतान सुख पाने वाली महिलाओं को भी कानून के दायरे में लाया गया है।
  • यह अवकाश  सवैतनिक होगा, साथ ही शिशु गृह  की व्यवस्था,याने आवश्यक क्रेंच सुविधा भी उपलब्ध कराएगा ।
  • इस विधेयक में 50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए शिशुगृह (क्रेच) की स्थापना के प्रावधान को अनिवार्य कर दिया गया है।
  • इन सभी बातों की जानकारी सभी कामकाजी महिलाओं को होना चाहिए।इसके अलावा प्रतिष्ठानों से कहा गया है कि वे महिला कर्मचारी को नियुक्ति के समय मातृत्व लाभ के बारे में जानकारी लिखित और ई-मेल (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम) के रूप में उपलब्ध कराएं।
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और संशोधन की आवश्यकता

किंतु संगठित क्षेत्र के अलावा असंगठित क्षेत्र की  महिला कर्मचारी को भी मातृत्व अवकाश का लाभ मिलना चाहिए। इसमे अब भी संशोधन की आवश्यकता है

इस हेतु नियोक्ता एवं सरकार को मिलकर कोई नियम बनाना चाहिए ताकि असंगठित क्षेत्रों में महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिया जा सके एवं उसका लाभ मिल सके, ताकि वह आर्थिक रूप से असुरक्षित ना हो,  ना ही उनके कैरियर पर कोई असर पड़े और ना ही उनके शिशु के सेहत पर कोई आंच आए ।

– धन्यवाद
पल्लवी वर्मा

 

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