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प्रेगनेंसी में कैसे सोये – Pregnancy me sone ke tarike

Pregnancy me kaise soye

गर्भावस्था के सफर में आप अपने शरीर में कई बदलाव महसूस करती है। उन बदलावों के अनुसार आपको अपनी कई आदतें भी बदलनी पड़ती है। इन आदतों में खाने की आदतें, सोने की आदत आदि मुख्य है। आपको गर्भावस्था में अपने सोने के तरीकों में कुछ बदलाव करना पड़ेगा।



हॉरमोनल चेंजिस के कारण आपकी नींद और सोने की साइकिल में खलल हो सकती है, जो प्रेग्नेंसी में होने वाली एक बड़ी प्रॉब्लम है। गर्भावस्था के आखरी महीनों के दौरान आप के पेट में वृद्धि होने के कारण भी ठीक से सोने में दिक्कत होती है। परंतु गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ रहेने के लिए आपको पर्याप्त अवधि में सोना चाहिए। इस लेख में हम प्रेग्नेंसी में कैसे सोना चाहिए उसपे गौर करेंगे।



Pregnancy me kaise sona chahiye in hindi

गर्भावस्था में सोने का सही तरीका

प्रेग्नेंसी के दौरान आपके शरीर में पल रहे शिशु के ग्रोथ के साथ आपके पेट और शरीर के अन्य भागों में बदलाव आता है। इसके साथ तालमेल करने के लिए शरीर ऐसे हार्मोन का उत्पादन करता है जिससे शरीर की मांसपेशियों में शिथिलता और ढीलापन आ जाता है। इसके कारण विविध पॉस्चर में अपने शरीर का अलाइनमेंट सही रखना आवश्यक है। जिसमे स्लीपिंग पॉस्चर भी एक महत्वपूर्ण परिस्थिति है। गर्भावस्था में सही तरीके से सोने से कमरदर्द, हार्ट बर्न, गास, एसिडिटी, सांस लेने की दिक्कत आदि प्रेग्नेंसी की प्रॉब्लम्स में राहत मिलती है। और पर्याप्त नींद पाकर आप स्वस्थ और फ्रेश महसूस कर सकती है।

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प्रेग्नेंसी में कैसे सोए, इस प्रश्न के लिए नीचे कुछ सामान्य सुझाव दिए गए है

गर्भावस्था में अपनी बाईं ओर करवट लेकर सोए

गर्भावस्था में सोने के तरीकों में सबसे बढ़िया तरीका SOS (Sleep On Side) है। इसका मतलब करवट लेकर सोना। अब आपको प्रश्न हो सकता है कि गर्भावस्था में किस करवट सोना चाहिए? विशेषज्ञ की सलाह अनुसार बाईं ओर करवट लेकर सोना उपयुक्त है। जिससे आपके प्लेसेंटा तक खून और पोषक तत्व आसानी से पहोच पाएंगे। 




गर्भावस्था में सोने के तरीके

गर्भावस्था में पीठ के बल ना सोए

विशेषज्ञ गर्भवती महिलाओं को सेकंड और थर्ड ट्राइमेस्टर के दौरान अपनी पीठ पर सोने से बचने की सलाह देते हैं। क्यूंकि नींद की स्थिति आपके गर्भाशय और बच्चे के पूरे वजन को आपकी पीठ पर आता है। तदोपरांत आपकी आंतों और आपके वेना कावा – खून के बहाव की मुख्य नली जो आपके निचले शरीर से रक्त को वापस हृदय तक ले जाती है, पर दबाव पड़ता है। यह दबाव पीठ दर्द और बवासीर को बढ़ा सकता है। पाचन की क्रिया में बाधा डाल सकता है। खून के परिसंचरण में बाधा उत्पन्न कर सकता है। और संभवतः हाइपोटेंशन (निम्न रक्तचाप) पैदा कर सकता है, जिसके परिणाम स्वरूप चक्कर आ सकता है। इस प्रकार कम रक्त संचलन भ्रूण के रक्त के प्रवाह को कम कर सकता है। जिससे आपके बच्चे को कम ऑक्सीजन और पोषक तत्व मिलेंगे। यदि आप थोड़े समय के लिए अपनी पीठ पर सोते हैं तो वह असुरक्षित नहीं है। लेकिन हफ्तों और महीनों तक लंबे समय तक आपकी पीठ पर सोना समस्याग्रस्त हो सकता है।

पेट के बल सोने की आदत

यह एक अच्छा विचार नहीं है। यदि आप पहले एक स्टमक स्लीपर थे। यानी कि आपको पेट के बल सोने की आदत थी, तो अब आपको अपने बढ़ते हुए गर्भ को समायोजित करने के लिए स्लीप पोजीशन को बदलना होगा। जब आप पेट के बल लेटते हैं, तो आपका पेट आपके फैलते हुए गर्भाशय पर दबाव डालता है। यह उल्लेखनीय है कि प्रेग्नेंसी में आपके स्तनों का कद भी बढ़ता है।

Garbhavastha me sona kaise chahiye ?

सोने के लिए पिलो की मदद ले

गर्भावस्था की नींद की समस्याओं से निपटने के लिए तकिए का उपयोग करे। अपनी साइड पोजीशन में खुद को आराम से सो पाने के लिए यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं। 

अपने पैरों और घुटनों को मोड़कर रखें। एक पैर को दूसरे के ऊपर रखने की कोशिश करें और उनके बीच में एक तकिया रखें। दूसरा तकिया पीठ के पीछे रखिए। आप एक से ज्यादा तकियों का प्रयोग कर सपोर्ट माउंटेन बना सकती है। आप कम्बल को रोल करके उसका प्रयोग भी कर सकती है। या कोई अन्य कॉम्बिनेशन जो आपको सोने में मदद करे उसे सेट करे।

अतिरिक्त सहायता के लिए, एक वेज के आकार का तकिया या 5-फुट पूर्ण शरीर वाले प्रेग्नेंसी पिलो का उपयोग करने का प्रयास कर सकते है। जो मार्केट में और ऑनलाइन अवैलेबल है।

यदि तकिए मदद नहीं करते हैं, तो बिस्तर के बजाय एक रिकलैनर में एक आधे सोने आधे बैठने की स्थिति में सोने की कोशिश करें। यह पोजीशन आपको गर्भावस्था के आखिरी दिनों में सांस लेने में आसानी होगी। हार्ट बर्न कि तकलीफ में भी राहत महसूस होगी। कमर दर्द में भी आराम रहेगा और आप रेस्ट ले पाओगे। आप अपने सिर और कंधों के लिए भी सही साइज़ के तकिए का चयन करें।

ध्यान रखें, कुछ रातों या कुछ हफ्तों के लिए सोने में असहज महसूस करना सामान्य है। आपका शरीर खुदको धीरे धीरे परिस्थिति के अनुसार ढाल लेगा। 




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