गर्भावस्था में बुखार आना

गर्भावस्था में बुखार आना-Pregnancy Me Fever In Hindi

जब किसी व्यक्ति के शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होता है तो उसे बुखार आना कहा जाता है सामान्य तौर पर 98.6 फारेनहाइट तापमान मनुष्य के शरीर का सामान्य तापमान माना जाता है । गर्भावस्था के दौरान  महिलाओं में बुखार आना एक सामान्य बात है । कई बार बुखार आना गर्भावस्था का संकेत देता है ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंडाशय से अंडे निकालने की प्रक्रिया के  दौरान शरीर के तापमान में वृद्धि होती है । अगर निश्चित तारीख से 2 हफ्ते तक महावारी ना आए और शरीर का तापमान अधिक रहे तो यह गर्भावस्था का संकेत हो सकता है ।

गर्भावस्था में बुखार आने के कारण-Pregnancy Me Fever In Hindi

निम्नलिखित कारणों से गर्भवती महिला को बुखार की स्थिति उत्पन्न हो सकती है –

लिस्टरियोसिस

गर्भवती महिला द्वारा दूषित पानी या भोजन के सेवन से तेज बुखार, दस्त, सर दर्द ,गले में ऐठन ,मांसपेशियों में दर्द आदि की समस्या हो जाती है जिसे लिस्टरियोसिस कहते हैं ।

यदि समस्या का समय पर उपचार न किया जाए तो समय से पहले प्रसव बच्चे की मौत या फिर गर्भपात जैसी जटिलताएं हो सकती  हैं ।

सर्दी जुकाम

गर्भावस्था के दौरान सर्दी – जुखाम होना सामान्य है जिसे इनफ्लुएंजा वायरस संक्रमण कहा जाता है। इस दौरान गले में खराश, खांसी और नाक का बहना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं सामान्य तौर पर 3 से 4 दिनों में ठीक हो जाता है परंतु यह तो डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है ।

 पेट का संक्रमण

विशेष प्रकार के वायरस और बैक्टीरिया के कारण पेट में संक्रमण हो जाता है जिसे गैस्ट्रोएन्टराइटिस के नाम से जाना जाता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी महिला को यह समस्या हो सकती है । इस दौरान उल्टी, दस्त और बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं समय पर इलाज कराने पर यह समस्या आसानी से समाप्त हो जाती है परंतु यदि समय पर इलाज ना करवाया जाए तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं ।

मूत्रमार्ग का संक्रमण (UTI)

गंदे अंतःवस्त्रों  का प्रयोग करने से अथवा सार्वजनिक शौचलय का प्रयोग करने से महिलाओं में मूत्र मार्ग संक्रमण की समस्या उत्पन्न हो जाती है । अंग्रेजी में इसे यूटीआई अर्थात यूरिनरी टेक्स्ट इन्फेक्शन कहते हैं। यह पुत्र मार्ग में होने वाला संक्रमण है । इस दौरान ठंड लगना बुखार आना और पेशाब के साथ खून आना आदि लक्षण दिखाई देते हैं । बार-बार पेशाब आना, पेशाब की मात्रा में वृद्धि होना आदि लक्षण मूत्रमार्ग के संक्रमण की ओर संकेत करते हैं । मूत्रमार्ग का संक्रमण कोई आम समस्या नहीं है संक्रमण होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर इलाज करवाना चाहिए अन्यथा समय से पहले प्रसव होने की संभावना बढ़ जाती है ।

डेंगू और मलेरिया

मुख्य रूप से मच्छरों के काटने से डेंगू और मलेरिया रोग होते हैं अतः गर्भवती महिला को चाहिए कि वह खुद को मच्छरों के काटने से बचा कर रखें । तेज बुखार आना, बुखार के साथ ठंड लगना ,पसीना आना ,कमजोरी महसूस होना, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द होना आदि डेंगू और मलेरिया के लक्षण है। मलेरिया के कारण गर्भपात समय से पूर्व प्रसव आदि समस्याएं हो सकती हैं डेंगू भी भ्रूण के विकास के लिए अत्यधिक घातक साबित होता है । गर्भवती महिला को खुद को मच्छरों से बचा कर रखना चाहिए और यदि बुखार के लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।

कोरोना वायरस संक्रमण

समान समय में जिस तरह से कोरोन वायरस संक्रमण बढ़ रहा है इसे देखते हुए प्रत्येक गर्भवती महिला को खुद को ही से बचाने का पूरा प्रयास करना चाहिए। कोरोना वायरस संक्रमण के दौरान खांसी, जुकाम, बुखार ,गंध एवम् स्वाद का महसूस ना और आदि लक्षण दिखाई देते हैं। कोरोना वायरस की अभी तक कोई दवाई नहीं बनी है उससे बचने के लिए मास्क लगाकर रहना चाहिए और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना चाहिए ।

भ्रूण का संक्रमण(कोरियोएम्नियोनाइटिस )

गर्भाशय के चारों तरफ कोरीअन और एम्नियन झिल्लियां होती हैं जिनमें उपस्थित एमनियोटिक द्रव भ्रूण के स्वस्थ और जीवित रहने के लिए उपयोगी होता है । कोरियोएम्नियोनाइटिस जीवाणु से होने वाला संक्रमण है जो इन सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है ।यदि गर्भवती महिला को बुखार के साथ-साथ और असामान्य रूप से पसीना आना, दिल की धड़कन तेज होना ,योनि से असामान्य स्त्राव और गर्भाशय का संवेदनशील होना जैसे लक्षण दिखाई दे तो यह कोरियोएम्नियोनाइटिस होने का संकेत है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यदि इस बीमारी का समय पर इलाज न किया जाए तो यह बीमारी मां मां के लिए समस्या पैदा कर सकती है साथ ही साथ गर्भस्थ शिशु को भी जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है ।

बुखार से कैसे बचें ?

गर्भावस्था में बुखार आने पर गर्भवती महिला को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है अतः कोशिश करनी चाहिए कि बुखार ना आए । गर्भावस्था के दौरान शरीर का हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है और साथ ही साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है ऐसे में निम्न उपायों को अपनाकर बुखार आने से बचा जा सकता है –

  • गर्भावस्था के दौरान विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण सही समय पर करवाना चाहिए ।
  • विटामिन सी का प्रचुर मात्रा में सेवन करना चाहिए ।
  • अत्यधिक ठंडी और बासी चीजों के सेवन से बचना चाहिए ।
  • अपने हाथों को समय-समय पर साबुन से धोते रहना चाहिए ।
  • किसी विशेषज्ञ के निर्देशन में हल्का फुल्का व्यायाम तथा योगा करते रहना चाहिए ।
  • धूम्रपान तथा अल्कोहल के सेवन से बचना चाहिए ।
  • समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए ।

उपरोक्त सभी उपायों को अपनाकर गर्भवती महिला बुखार आने से बच सकती है परंतु फिर भी अभी बुखार आए तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए ।

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