गर्भावस्था के लिए स्पर्म कितना काउंट होता है।

अगर आपके 1 मिलीलीटर स्पर्म में डेढ़ करोड़ से कम शुक्राणु है तो आप में शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम है।आपको बता दें कि स्वस्थ पुरुष के स्पर्म में 40 मिलियन से 300 मिलियन के बीच में स्पर्म प्रति मिलिलीटर होना चाहिए। यदि स्पर्म प्रति मिलिलीटर 10 मिलियन से 20 मिलियन के बीच है तो इसे खराब यानि लो स्पर्म काउंट माना जाता है। यदि स्पर्म हेल्दी है तो प्रेग्नेंसी के लिए 20 मिलियन स्पर्म प्रति मिलिलीटर पर्याप्त हो सकता है।




लो स्पर्म काउंट के लक्षण

  • शुक्राणु की कमी का सबसे मुख्य लक्षण यह है कि वह व्यक्ति बच्चे पैदा करने में असमर्थ होता है इस समस्या का कोई स्पष्ट संकेत या लक्षण नहीं दिखाई देता है कुछ मामलों में हार्मोन में वंशानुगत असंतुलन वृषण की बढी हुई नसें और ऐसी स्थितियां जिस से शुक्राणुओं के मार्ग में रुकावट आती है इस तरह के लक्षण दिखाई दे सकते है जो इस प्रकार है।
  • कामेच्छा में कमी या लिंग को जड़ बनाए रखने में कठिनाई
  • वृषण क्षेत्र में दर्द सूजन या गांठ
  • चेहरे या शरीर के बालों का कम होना य क्रोमोसोम अथवा हार्मोन की असमानता के अन्य लक्षण
  • अगर आप 1 वर्ष तक नियमित और बिना कंडोम संभोग करने के बाद भी गर्भधारण करवा पाने में असमर्थ हैं।
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लो स्पर्म काउंट के कारण

शुक्राणु का उत्पादन एक जटिल प्रक्रिया है इसके लिए वृषण के साथ-साथ हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथि को समान रूप से कार्य करने की आवश्यकता होती है। वृषण में उत्पन्न होने के बाद शुक्राणु पतली ट्यूब में तब तक रहते हैं जब तक स्पर्म के साथ मिलकर लिंग से बाहर नहीं निकल जाते। इनमें से किसी भी अंग की ठीक से काम न करने के कारण शुक्राणु उत्पादन में कमी आ सकती है।

मेडिकल कारण

कभी-कभी स्वास्थ्य समस्याऐं या मेडिकल उपचार के कारण शुक्राणुओं में कमी आ जाती है जो इस तरह है-




  • वेरीकोसेल
  • संक्रमण
  • रस्खलन समस्याऐ
  • शुक्राणुओ को नुकसान पहुचाने वाले ऐंटीबॉडी
  • ट्यूमर
  • अनडिसेंडिड वृषण
  • हार्मोन असंतुलन
  • शुक्राणु वाहिनी मे दोष
  • क्रोमोसोम दोष
  • सीलिएक रोग

पर्यावरण सम्बन्धी कारण

कुछ पर्यावरण तत्वों के अत्याधिक संपर्क में आने से शुक्राणुओं का उत्पादन या कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है जो इस प्रकार है-



  • औद्योगिक रसायन भारी धातुओं के संपर्क में आना विकिरण या एक्सरे
  • वृषण का ज्यादा गर्म होना
  • लंबे समय तक साइकिल चलाना

स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े कारण

लो स्पर्म काउंट की कम होने की कुछ कारण हमारी जीवनशैली से जुड़े होते हैं जो इस प्रकार हैं-
अवैध नशीली दवाओं का प्रयोग



  • शराब का सेवन
  • धूम्रपान
  • तनाव
  • वजन

लो स्पर्म काउंट के नुकसान

लो स्पर्म काउंट या शुक्राणु की कमी बांझपन तक ही सीमित नहीं रह गया है,बल्कि यह पुरुषों में बीमारी के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। एक नए अध्ययन में पता चला है कि लो स्पर्म काउंट या कम शुक्राणुओं वाले पुरुषों में हृदय रोग और मधुमेह जैसी संभावित घातक बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है। एक शोध में पाया गया कि कम शुक्राणुओं की संख्या वाले लोगों में उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और शरीर में अधिक फैट का बीस प्रतिशत अधिक है।

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स्पर्म बढ़ाने के उपाय

जंक फूड से परहेज-

जंक फूड शब्द का अर्थ उस भोजन से है, जो आपके शरीर के लिए बिल्कुल भी सही नहीं होता है। इसमें पोषण की कमी होती है और शरीर के तंत्र के लिए नुकसानदेह होता है। जंक फूड, कैफीन, शुगर और प्रोसेस्ड फूड यह कुछ ऐसी चीजें है जिसकी वजह से आपका स्पर्म काउंट घट सकता है। इसलिए इसका सेवन बहुत ही कम कर दीजिए। इसके अलावा जंक फूड खाने से दिल के रोगों का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि जंक फूड में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसेराइड प्रचुर मात्रा में होता है।

सिगरेट और अल्कोहल दूरी-

शराब और सिगरेट की लत ऐसी है कि अच्छे अच्छों का घर और शरीर दोनो तबाह कर देता है। एक बार अगर नशे की लत लग गई तो इससे पीछा छुड़ाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। यदि आप स्पर्म बढ़ाने के उपाय के बारे में सोच रहे हैं तो आपको सबसे पहले सिगरेट और अल्कोहल जैसी बुरी आदतों छुटकारा पाना होगा। यह न केवल आपके लिवर और फेफड़े को बर्बाद करते हैं बल्कि आपने प्रजनन क्षमता को भी प्रभावित करते हैं।

पौष्टिक आहारों का सेवन-

विटामिन और मिनरल से भरपूर पौष्टिक आहार आपके स्पर्म बढ़ाने के उपाय में एक बेहतरी उपाय है। इसके लिए आप अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां तथा फलों को शामिल कीजिए। इसके अलावा ड्राई फ्रूट भी इसमें योगदान दे सकता है। विटामिन डी, विटामिन सी और विटामिन ई जैसे कुछ प्रकार के विटामिन, हेल्दी स्पर्म के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा मछली का तेल ओमेगा -3 फैटी एसिड में समृद्ध हैं जो स्वस्थ पुरुष प्रजनन के लिए आवश्यक है।

वजन पर करें कंट्रोल-

यदि आपका वजन ज्यादा है तो इसे कम करने की कोशिश कीजिए। स्पर्म काउंट बढ़ाने के उपायों में यह बहुत ही असरदार उपाय है। अध्ययनों से पता चला है कि वजन घटाने से वीर्य या सीमेन की मात्रा, एकाग्रता और गतिशीलता के साथ ही साथ स्पर्म की समग्र स्वास्थ्य में वृद्धि हो सकती है।

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लहसुन का प्रयोग-

लहसुन को साधु संत लोग तो इसीलिए ही नहीं खाते क्योंकि यह प्राकृतिक कामोद्दीपक की तरह कार्य करता है लहसुन स्पर्म पादन को बढ़ावा देने में मददगार है इसमें एलिसिन नामक योगिक मौजूद होता है जो स्वयं को बढ़ाता है और रक्त परिसंचरण में सुधार भी करता है इसके अलावा लहसुन में मौजूद सेलेनियम स्पर्म गतिशीलता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

स्पर्म काउंट बढाने के लिए ग्रीन टी-

ग्रीन टी में ऑक्सी एक्सीडेंट की अधिक मात्रा फर्टिलिटी को बढ़ाती है क्योंकि ये स्पर्म कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले मुक्त कणों को बेअसर कर देते हैं ग्रीन टी में मौजूद एपीगैलोकेटचीन गैलेट स्पर्म की गुणवत्ता में सुधार करता है।

स्पर्म काउंट बढाने के लिए अश्वगंधा-

अश्वगंधा का जूस कौन हेल्थ के लिए काफी लाभदायक माना जाता है या न केवल इस काम को बढ़ाने में मदद करता है बल्कि वीर्य की मात्रा स्पर्म गतिशीलता को भी बढ़ाता है इसके अलावा यह जड़ी-बूटी हैल्थी टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को भी बढ़ावा देती है।

सॉ पालमेत्तो-

सॉ पामेत्तो का उपयोग कई हेल्थ कंडीशन के लिए किया जाता है उन्हीं में से एक है प्रोस्टेट हेल्थ जिसके लिए इसका उपयोग किया जाता है ये जड़ी बूटी स्पर्म काउंट बढ़ाने में मदद करती है।

स्पर्म बढ़ाने के लिए नियमित रूप से करें व्यायाम-

अगर पूरे दिन सक्रिय रहते हैं तो इससे आपको स्पर्म बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्वस्थ जीवनशैली और व्यायाम करने से आपके शुक्राणुओं या स्पर्म को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। एक अध्ययन में पाया गया कि आउटडोर एक्सरसाइज शुक्राणु के स्वास्थ्य में मदद कर सकता है।

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