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बच्चे का रंग गोरा करने का तरीका

किसी भी शिशु का काला या गोरा होना माता पिता के रंग पर निर्भर करता है। कभी कभी कहते है कि बच्चा परिवार के किसी और सदस्य पर गया है इसलिए बच्चें का रंग माता पिता के रंग से अलग है। जब शिशु पैदा होता है यदि उसका रंग ज्यादा ही गहरा हैं तो माता को चिंता हो जाती है, काला या गोरा होने से कोई फर्क नही पड़ता लेकिन फिर भी यदि किसी कारण से बच्चे का रंग थोड़ा गहरा है तो उसे साफ करने की कोशिश की जा सकती है। वैसे बच्चे का रंग बच्चे में उपस्थित मिलेनिन पिग्मेंट पर निर्भर करता है।



मिलेनिन का निर्माण केलामो साइट्स सेल्स में होता है, बाहरी उपचार का बहुत ही कम प्रभाव इन सेल्स पर पड़ता है। पर थोड़ा प्रभाव जरूर होता है, जैसे ज्यादा देर धूप में रहने पर मिलेनिन का उत्पादन बढ़ जाता है और रंग सांवला हो जाता है। कहने का अर्थ ये है कि घरेलू नुस्खे से रंग में एक या दो शेड का फर्क लाया जा सकता है। पिग्मेंट की मात्रा जितनी ज्यादा होगी बच्चा उतना ही सांवला होगा।

सांवले बच्चे को गोरा नही किया जा सकती पर त्वचा पर निखार और चमक लाई जा सकती है। दसअसल होता ये है कि जब बालक जन्म लेता है तो उसके शरीर पर बालो की एक बहुत पतली परत होती है। ये परत एमनीओटिक फ्लूइड से बच्चे की त्वचा की रक्षा करते है। ये परत सफेद रंग की होती है इसीलिए जब बच्चा पैदा होता है तो गोरे रंग का लगता है। इसका एक कारण बच्चे की त्वचा का पारदर्शी होना भी है जिससे बालक की त्वचा हल्की लाली लिए होती है।

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धीरे धीरे परत हल्की पड़ने लगती है और बच्चे का स्वाभाविक रंग नजर आने लगता है। इसलिए बहुत लोग कहते है कि बच्चा करीब 5 से 6 महीने तक रंग बदलता है। कई बार शिशु की तबियत खराब होने से भी रंग में फर्क पड़ता है। कुछ सावधानियां बरतने से भी शिशु के साफ रंग को बचाया जा सकता है।

रंग साफ करने के घरेलू नुस्खे

बच्चे की त्वचा बहुत संवेदनशील होती है तो किसी भी प्रकार की जबर्दस्ती शिशु की त्वचा के साथ ना करे।
कुछ भी करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से जरुर पूछ लें।



घर के बने उबटन

एक चम्मच चंदन का पाउडर ले, पर ध्यान रखे चंदन पाउडर असली हो। लोकल दुकानों पर मिलने वाला सस्ता पाउडर ना ले जो दुकान वाले चंदन का बताकर बेचते है। इस चंदन का पीला रंग क्रोमियम और लेड की मिलावट से तथा नारंगी रंग लेड ऑक्ससाइड की मिलावट से बनाया जाता हूं। ये मिलावट बच्चे को सांस का रोग दे सकती है। अब चम्मच चंदन पाउडर में कुछ बूंद कच्चे दूध की मिलाकर एक चुटकी हल्दी मिलाए औऱ हल्के हाथ से त्वचा पर लगाकर साफ कर दे।






  • नारियल पानी मे शुद्ध गुलाब जल मिलाकर बच्चे के शरीर पर मले और सुख जाने पर नहला दे।
  • कच्चे दूध या दही में बैसन मिलाकर उबटन बनाएं और हल्के हाथ से बच्चे के शरीर पर रगड़कर साफ कर दे।
  • जब बच्चा जूस पीने लगे तो मौसम के अनुसार संतरे, सेब, या अंगूर का जूस पिलाए।
  • हल्के गुनगुने तेल से बच्चे की मालिश करे,तेल ज्यादा गर्म ना हो, बादाम, नारियल, सरसो, अरंडी या ज जैतून के तेल का इस्तेमाल कर सकते है।
  • मालिश से बच्चे का ब्लड सर्क्युलेशन इम्प्रूव होता है जिससे त्वचा मुलायम और चमकीली होती है।
  • इसके अलावा बच्चे की हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
  • कुछ बादाम रात को भिगो ले, सुबह उन्हें छील कर पीस ले।
  • अब इस पेस्ट में दही मिलाकर बच्चे के शरीर पर हल्के हाथों से मले।
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  • अगर आपके पास समय की कमी है और बच्चे की त्वचा के साथ ज्यादा एक्सपेरिमेंट नही करना चाहती तो कच्चा दूध प्रयोग करिये। ये बहुत ही अद्भुत और इफेक्टिव तरीका है, कच्चे दूध में रुई भिगो कर शरीर पर लगाए। सूख जाने पर गुनगुने पानी से धो दे।
  • ताजे पपीता का गूदा और शहद मिलाकर मिश्रण बनाए, बच्चे के चेहरे और शरीर पर कुछ देर मलकर गुनगुने पानी से धो दे।
  • बच्चे को सदैव हल्के गुनगुने पानी से नहलाएं, तेज गर्म या ज्यादा ठंडे पानी से नहलाने पर बच्चे की त्वचा खुश्क हो सकती है।
    खुश्क त्वचा रूखी होकर काली दिखने लगती है।
  • बच्चे के शरीर पर साबुन का इस्तेमाल ना करे, साबुन त्वचा को रूखा और बेजान बनाता है। इसके स्थान पर कच्चा दूध और गुलाबजल का मिश्रण इस्तेमाल करे।
  • बच्चे की त्वचा की नमी बरकरार रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि बच्चा 9 महीने गर्भ के वातावरण से निकल बाहरी दुनिया मे आता है।
  • नमी के तेल मालिश के अलावा अच्छे ब्रांड की मॉस्चोराइज़र क्रीम इस्तेमाल करे। व्यस्को की क्रीम शिशु के लिए प्रयोग ना करे।
  • बच्चे को हाइड्रेट रखे, भरपूर मात्रा में पानी और नारियल पानी पिलाए।
  • आजकल मार्केट में बेबी वाइप्स मिलते है जो बहुत ही साफ और मुलायम होते है। बच्चे को साफ करने के लिए इनका इस्तेमाल बच्चे की त्वचा को गैरजरूरी रगड़ से बचाता है।

सावधानियां

  • सबसे पहले तो आप ये समझ ले कि बच्चे का प्राकृतिक रंग आप नही बदल सकते। इसलिए शिशु के रंग को लेकर बेकार का तनाव ना पाले।
  • बिना जांच परख के कोई भी नुस्खा बच्चे पर ना आजमाए ये नुकसानदेह हो सकता है। बच्चें के पैदा होते ही रंग गोरा करने के पीछे ना पड़ जाए।
  • बच्चे के स्वाभाविक रंग के आने तक अर्थात लगभग 6 से 8 महीने का इंतजार करे। बच्चे को पीलिया से बचाने और विटामिन D की पूर्ति के लिए कुछ देर धूप में जरूर रखे।
  • बच्चा धूप में ले जाने से बच्चा काला हो जाएगा ये सोचकर उसकी सेहत खिलवाड़ ना करे।
  • कच्चे दूध से बच्चे को डायरिया जैसा इन्फेक्शन हो सकता है।
  • मलाई से बच्चे की त्वचा पर चक्कते हो सकते है।
  • बेसन का खुरदुरापन शिशु की त्वचा पर खरोच डाल सकता है।
  • टेलकम पाउडर से कोई गोरा नही होता तो इसे बिल्कुल भी इस्तेमाल ना करे।
  • ये बच्चे को सांस का इन्फेक्शन दे सकता है।
  • गोरा बनाने वाली क्रीम केवल एक मिथ है, इनमें खतरनाक केमिकल होते है।
  • इनमें शामिल हैड्रोक्विनोंन, मर्करी बच्चे को नुकसान पहुँचा सकते है
  • सबसे जरूरी है कि बच्चा जैसा है आप उसे स्वीकार करे, ये आगे चलकर उसके सम्मान के लिए भी जरूरी है।
  • रंग से ज्यादा बच्चे का स्वस्थ्य और एक्टिव रहना ज्यादा जरूरी है।
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