जैतून के तेल की मालिश के तरीके

हमारे बुजुर्गों के जमाने से ही बच्चों की मालिश पर विशेष ध्यान दिया जाता रहा है।कहते हैं नवजात शिशुओं की मालिश दिन में कम से कम दो बार तो अवश्य करनी चाहिए।नवजात शिशुओं की हड्डियां कमजोर होती हैं क्योंकि बच्चा 9 महीने जब माँ के गर्भ में होता है तो बच्चेदानी में रहता है जो कि थैलीनुमा होती है जिसमें बच्चे के हाथ पैर मुड़े हुए होते हैं तो त्वचा पर सिलवटें आ जाती हैं और उनकी हड्डियां भी कमजोर रहती हैं।मालिश करने से हड्डियां भी मजबूत होती हैं और त्वचा की सिलवटें भी हटने लगती हैं। शिशु के सम्पूर्ण विकास की क्रिया में मालिश की अहम भूमिका होती है।मालिश के लिए सर्वप्रथम हमें उपयुक्त तेल का चुनाव करने की जरूरत होती है।

तेल हमें मौसम के अनुसार लेना चाहिए सर्दी के मौसम में गरम तेल जैसे कि सरसों का तेल और गर्मी के मौसम में ठंडा तेल जैसे कि नारियल का तेल।विगत वर्षों में मालिश के लिए जैतून के तेल का उपयोग होने लगा है।डॉक्टर भी जैतून के तेल से मालिश की सलाह देते हैं।क्योंकि जैतून का तेल हम किसी भी मौसम में मालिश के लिए प्रयोग में ले सकते हैं। यह शिशुओं की नाजुक त्वचा के लिए सबसे उपयुक्त तेल है।इससे शिशुओं की त्वचा पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।आजकल बाजार में कई तरह के जैतून के तेल आते हैं जिनमें से कई मिलावटी भी होते हैं जो शिशुओ की कोमल त्वचा पर दुष्प्रभाव भी डाल सकते हैं इसलिए हमें तेल का चुनाव करते वक्त अच्छे ब्रांड का तेल लेना चाहिए। कोल्ड प्रेस्ड वर्जिन ऑलिव ऑइल सबसे अच्छा रहता है।हमें मालिश के लिए यही तेल लेना चाहिए।

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जैतून के तेल से मालिश के कुछ फायदे इस प्रकार हैं

  • जैतून के तेल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसलिए उससे त्वचा कोमल रहती है।
  • जैतून का तेल रक्त संचार बेहतर करता है और क्रेडल क्रेप यानी कि बच्चों के सिर की त्वचा खुश्क होकर जो पपड़ी पर जाती है उसमें बहुत फायदा करता है।
  • शिशुओं के मानसिक विकास में सहायक है।बच्चों को नींद अच्छी आती है।
  • अगर शिशु को जुकाम और खांसी हो रही हो, तो उसके शरीर पर जैतून के तेल की मलिश करने से जुकाम और खांसी में भी राहत मिल सकती है
  • जैतून के तेल की मालिश से शिशु की हड्डियां मजबूत होती हैं और वजन बढ़ाने में भी सहायक होता है।
    मालिश करते वक्त हमें कुछ बातों पर ध्यान देने की विशेष आवश्यकता होती है।
  • अगर बच्चे ने तुरंत दूध पिया है तो कम से कम एक घण्टे के बाद ही उसकी मालिश करें।मालिश के बाद भी दस मिनट बाद ही दूध पिलाएं।
  • मालिश न ज्यादा जोर से करें और न ही ज्यादा हल्के हाथों से।
  • मालिश करते वक्त कमरे का तापमान सामान्य रहना चाहिए।एसी न चलाएं पंखे की हवा भी ज्यादा तेज न रखें।
  • मालिश करते वक्त शिशु के साथ बातें करते रहें जिससे शिशु और आपके बीच एक अलग ही रिश्ता और अपनापन कायम होता है।
    हाथों को साफ रखें,गन्दे हाथों से मालिश न करें।हाथ ज्यादा ठंडे न हों और हाथों को सुखा रखें।मालिश करने के लिए शिशु को जिस कपड़े पर लिटा रहे हों वो सूती और पतला होना चाहिए।
  • अगर मालिश करते वक्त बच्चा ज्यादा रो रहा हो तो मालिश करना उस वक्त के लिए रोक दें।बाद में जब बच्चा खेलने लगे तब उसकी मालिश करें।
  • मालिश करने का एक पैटर्न होता है उसी पैटर्न में मालिश करें।
  • शिशु के कपड़े खोलकर अपने पैरों को सीधा करें और शिशु को पैरों पर लिटा लें।थोड़ा-सा जैतून का तेल अपनी हथेलियों में ले कर,
  • शिशु के सीने के बीच गोलाकार पैटर्न में मालिश की शुरुआत करें।
  • सीने से होते हुए शिशु के हाथों और कंधों की मालिश करें।हाथों को सीधा करके हल्का दबाव बनाते हुए मालिश करें।शिशु को हाथ का सहारा देकर पेट के बल लिटाएं और इसी प्रकार शिशु की पीठ की मालिश करें। अब बच्चे के पैरों और तलवों की मालिश करें ।दोनो पैरों को सीधा करके एक साथ मालिश करें। अब बच्चे को हाथ का सहारा देकर बैठाएं और उसके सिर और चेहरे पर थोड़ा जैतून का तेल लगाकर हल्की मालिश करें।  लगभग 15-20 मिनट तक मालिश करने के बाद शिशु को कुछ देर खेलने दें और फिर उसे हल्के गुनगुने पानी से नहला दें या गीले कपड़े से साफ कर दें।पाउडर लगाकर सूती और आरामदायक कपड़े पहना दें।
    जैतून के तेल से की हुई मालिश नवजात शिशुओं और पांच साल तक के बच्चों के विकास में सहायक होता है।जैतून का तेल वयस्क व्यक्तियों के लिए भी उतना ही फायदेमंद होता है जितना कि शिशुओं के लिए।हर तरह के दर्द में जैतून के तेल की मालिश से आराम मिलता है।कोल्ड प्रेस्ड वर्जिन ऑलिव ऑइल ही मालिश के लिए इस्तेमाल करें क्योंकि इसमें हानिकारक रसायन नहीं होता हैं जो त्वचा के लिए नुकसानदायक होते हैं।
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-Rimjhim Agarwal

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